नमस्कार, रिलायंस फाउंडेशन प्रस्तुत, सोयाबीन की बौवनी बी.बी.एफ. (चौड़ी क्यारी पद्धति) या रिज-फरौ (कूड़ मेड़ पद्धति) से ही करें जिससे सुखे/अतिवर्षा के दौरान उत्पादन प्रभावित ना हो। इन मशीनों के अभाव में कृषकगण अन्य उपलब्ध सीड ड्रिल से भी बौवनी कर सकते है तथा बौवनी पश्चात् तुरन्त सुविधा के अनुसार 3/6/9 कतारों के अंतराल पर देशी हल चलाकर नालियाँ बनाने की व्यवस्था करें जिससे अतिरिक्त पानी का निकास एवं सूखे की स्थिति में जल संचय की व्यवस्था हो सकें। यह जानकारी ग्रामीण कृषि-मौसम सेवा एवं कृषि महाविद्यालय, इंदौर से प्राप्त|
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