नमस्कार किसान भाईयों व बहनों, रिलायंस फाउंडेशन और कृषि विज्ञान केंद्र, चुरू के सहयोग से किसानों को सलाह है कि बाजरे के पौधों में पाया जाने वाला तना छेदक कीट का प्रभाव पौधों पर विकास के दौरान कभी भी देखने को मिल सकता हैं, इस रोग की सुंडी पौधे के तने को अंदर से खाकर नष्ट कर देती है| सुंडी के द्वारा तने को खाने से वो काफी कमजोर हो जाता हैं| जिससे तेज़ हवा चलने पर पौधा टूटकर गिर जाता है. जिसका प्रभाव पैदावार पर देखने को मिलता है, इसके नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर साफ मौसम में छिड़काव करें, धन्यवाद|
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