नमस्कार पशुपालक भाईयों व बहनों, रिलायंस फाउंडेशन और पशुपालन विभाग, उदयपुर के सहयोग से पशुपालकों को सलाह है कि बकरी को आंतरिक परजीवी से अधिक हानि पहुँचती है। इसमें गोल कृमि, फीता कृमि, फ्लूक, और प्रोटोजोआ प्रमुख है। इसके प्रकोप के कारण उत्पादन में कमी, वजन कम होना, दस्त लगना, शरीर में खून की कमी होती है। शरीर का बाल तथा चमड़ा रूखा-रूखा दिखता है। इसके कारण पेट भी फूल सकता है तथा जबड़े के नीचे हल्की सूजन भी हो सकती है। इसके आक्रमण से बचाव तथा उपचार के लिए बकरी के मल की जाँच कराकर कृमि नाशक दवा देनी चाहिए। कृमि नाशक दवा तीन से चार माह के अंतराल पर खासकर वर्षा ऋतु शुरू होने के पहले और बाद अवश्य दें, धन्यवाद।
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