नमस्कार, किसान भाईयों व बहनों, रिलायंस फाउंडेशन और भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर मध्य प्रदेश के सहयोग से आपको सलाह है की, विगत कुछ वर्षों में देखी जा रही मौसम की विषम परिस्थिति तथा इससे होने वाली संभावित हानि को कम करने हेतु यह अनुशंसा है कि किस्मों की विविधता प्रणाली (वैरायटल केफेटेरिया अप्रोच) अपनाएं अर्थात् हमेशा 3-4 किस्मों की खेती करनी चाहिये। इससे फलियों के चटकने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। साथ ही कीट-व्याधियों के नियंत्रण, कटाई- गहाई में पर्याप्त समय की सुविधा के साथ-साथ किस्मों की अधिकाधिक उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का भी लाभ मिलता है।
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