धान की फसल - सिंचाई, खैरा रोग एवं कीट प्रबंधन

नमस्कार किसान साथियो, धान की फसल में बालियाँ निकलने, फूल आने तथा दाने में दूध भरने की अवस्था के दौरान खेत में उचित नमी बनाए रखें। जहाँ जिंक की कमी के कारण खैरा रोग के लक्षण दिखाई दें, वहाँ 5-10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर तथा 2% यूरिया घोल का छिड़काव करें। खेत में लंबे समय तक पानी जमा न होने दें और आवश्यकता अनुसार उचित जल निकास की व्यवस्था करें। धान की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक एवं हॉपर कीटों की नियमित निगरानी करते रहें तथा प्रकोप दिखाई देने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। अधिक जानकारी एवं कृषि सलाह के लिए रिलायंस फाउंडेशन WhatsApp Bot: 8779500400 पर संपर्क करें। 📢 नवीनतम कृषि एवं मौसम संबंधी जानकारी के लिए RFIS उत्तर प्रदेश WhatsApp चैनल को फॉलो करें।
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